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अब नहीं दिखेगा सुपर ऑलराउंडर !

Posted On: 10 Mar, 2012 sports mail में

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rahul dravidक्रिकेट की दुनिया में ऑलराउंडर उसको कहते हैं जो बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों के फन में माहिर हो और वह फील्डिंग भी कर सके. लेकिन जो इंसान गेंदबाजी, बल्लेबाजी और क्षेत्ररक्षण के अलावा टीम की जरूरत के अनुसार विकेटकीपिंग, कप्तानी और सभी काम कर सके उसे तो सुपर ऑलराउंडर ही कहेंगे ना. और क्रिकेट की दुनिया में अगर कोई सुपर ऑलराउंडर है तो वह है राहुल द्रविड़. अपनी टीम के लिए इस खिलाड़ी ने वह सब किया जिसकी टीम को जरूरत थी. जब टीम ने कहा ओपनिंग की जब जरूरत हुई मध्यक्रम में आए, जब आवश्यकता हुई निचले क्रम में उतरे, टीम के लिए विकेट कीपिंग भी की और कप्तानी में भी जौहर दिखाए. कहा जाता है अगर टीम को जरूरत हो तो द्रविड़ कांच के टुकडों पर भी चलने को राजी रहते हैं.


वॉल का बाय बाय

खेल के प्रति इस भावना की वजह से ही उन्हें इस जेंटलमेंस गेम का जेंटलमैन कहा जाता है. द वॉल, मिस्टर डिपेंडेबल और ना जानें कितने ही नाम उनकी शान में चार चांद लगाते हैं. राहुल द्रविड़ ने भारतीय क्रिकेट टीम की मंझदार में फंसी नैया को अनगिनत बार पार लगाया है. दुनिया के सर्वोत्तम तकनीकी बल्लेबाजों में गिने जाने वाले राहुल द्रविड़ ने अब अपने पहले प्यार क्रिकेट को अलविदा कह दिया है.


टीम इंडिया की दीवार के नाम से मशहूर द्रविड़ ने 16 साल के अंतरराष्ट्रीय करियर में वनडे क्रिकेट को पिछले साल इंग्लैंड दौरे के दौरान अलविदा कह दिया था. और इस साल संपन्न हुए आस्ट्रेलिया दौरे पर बेहद खराब प्रदर्शन के बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया.


‘द वाल’ के नाम से मशहूर द्रविड़ ने जून 1996 में आगाज किया था, हालांकि वह इंडियन प्रीमियर लीग [आईपीएल] के पांचवें चरण में जयपुर की फ्रेंचाइजी राजस्थान रायल्स की अगुवाई करेंगे. द्रविड़ ने 164 टेस्ट मैचों में 13,288 रन बनाए हैं और वह तेंदुलकर [188 टेस्ट में 15,470 रन] के बाद सर्वाधिक रन बनाने वाले दूसरे क्रिकेटर हैं. द्रविड़ के नाम टेस्ट मैचों में सर्वाधिक 210 कैच लपकने का विश्व रिकार्ड भी है. उन्होंने स्लिप कैचों में मार्क वा को पछाड़ा था. इसके अतिरिक्त उनके वनडे में 196 कैच हैं.


क्या होगा टीम का

इस समय भारतीय क्रिकेट टीम में ऐसा कोई खिलाड़ी नजर नहीं आता जो द्रविड़ का विकल्प साबित हो. जिस समय सौरभ गांगुली ने अपनी रिटायरमेंट घोषित की थी उस समय उनके विकल्प के रूप में गौतम गंभीर मौजूद थे लेकिन राहुल द्रविड़ का धैर्य, तकनीक और शैली का विकल्प दूर-दूर तक नजर नहीं आता. मात्र एक-दो सीरीज के खराब प्रदर्शन की वजह से बोर्ड ने उनसे संन्यास दिलवा दिया जो बिलकुल सही नहीं लगता.


द्रविड़ का कोई नहीं सानी

द्रविड़ की बल्लेबाजी की खासियत उनका धैर्य है. यह धैर्य ना सिर्फ मैदान पर नजर आता है बल्कि मैदान के बाहर भी द्रविड़ का व्यवहार काबिलेतारीफ होता है. द्रविड़ दुनिया के उन चंद क्रिकेटरों में शुमार हैं जिनके बोलने का तरीका बेहद शानदार है. द्रविड़ मैदान पर अगर टीम की हर जरूरत को पूरा करते हैं तो मैदान के बाहर भी टीम के लिए हमेशा आगे रहते हैं.


बांटिए अपने पल

राहुल द्रविड़ ने यूं तो अपने कॅरियर में कई बेहतरीन पारियां खेली हैं लेकिन ऐसी कौन सी पारी है जिसे आप उनकी सर्वश्रेष्ठ पारी मानते हैं और क्यूं? अपने पसंदीदा क्रिकेटर द वॉल यानि द्रविड़ के बारे में हमसे शेयर कीजिए उन पलों को जिनकी वजह से आप मानते हैं द्रविड़ हैं बेमिसाल.


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1 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rajput के द्वारा
March 10, 2012

इस खिलाड़ी के क्या कहने, जब भी इस खिलाडी का नाम जहन में आता है तो सबसे पहले एक योग्य खिलाड़ी का चेहारा सामने आता है. जो हर तरह के फॉर्मेट में बिलकुल फिट बैठता है. अपने बेहतर खेल के साथ सादगी और शालिनता लाना इनकी पहचान थी. राहुल द्रविड उन खिलाड़ियों में से थे जिनके बिना भारतीय क्रिकेट पहंचानी नहीं जाती. भारत में क्रिकेट को लोकप्रिय करने में इन जैसे खिलाडियों का भरपूर हाथ रहा. उम्मीद करते हैं रिटायर के बाद भी राहुल किसी दूसरे रूप में क्रिकेट को अपनी सेवा देते रहेंगे.


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