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सचिन के असली भाई नहीं हैं अजीत, उन्हें महान खिलाड़ी बनाने के लिए दी थी कुर्बानी

Posted On: 22 Nov, 2016 Sports and Cricket में

Pratima Jaiswal

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आपने सिगरेट फूंकते हुए कई लोगों को देखा होगा. सिगरेट पीने की सबकी अपनी वजह हैं. इन वजहों में से मुमकिन है, कोई इंसान ये भी कह दे कि उनकी सिगरेट पीने की वजह के पीछे कोई इंसान है. जिसकी वजह से उसने सिगरट पीनी शुरू कर दी. उसी तरह जिंदगी में कई काम ऐसे होते हैं जिनकी वजह हमारे आसपास ही छुपी होती है. सबसे खास बात ये है कि जब हम अपने इस काम में कामयाब हो जाते हैं तो यही वजह प्रेरणा बन जाती है.


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कुछ ऐसी ही कहानी है क्रिकेट के भगवान माने जाने वाले सचिन तेंदुलकर की जिंदगी की. जिसके बारे में बहुत ही कम लोग जानते हैं. महज 16 साल की उम्र में क्रिकेट की दुनिया में आगाज करने वाले सचिन के फैंस दुनिया भर में हैंं. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि आज अगर सचिन क्रिकेट की चमकती दुनिया के सितारे हैंं, तो इसके पीछे सबसे बड़ी वजह है उनके सौतेले भाई अजीत तेंदुलकर. सचिन ने क्रिकेट खेलना अपने बड़े भाई अजीत तेंदुलकर की वजह से ही शुरू किया था.



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अपने बड़े भाई अजीत की तरह बनना चाहते थे सचिन

क्रिकेट को अलविदा करते वक्त सचिन अपने भाई अजीत के बारे में बताते हुए काफी भावुक हो गए थे. उस दौरान सचिन ने कहा था ‘इसमें कोई दो राय नहीं है कि मेरे क्रिकेट खेलने की वजह अजीत भईया ही रहें हैं. आज मैं जो कुछ भी हूं उसे पाना नामुमकिन होता अगर अजीत भईया मेरे साथ नहीं होते’.



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अपने क्रिकेट कॅरियर को दांव पर लगाया सचिन के भाई ने

सचिन को बचपन से क्रिकेट का शौक था. वो अपने सपनों से लेकर छोटी-बड़ी हर बातों को अपने भाई अजीत तेंदुलकर से शेयर किया करते थे. अजीत तेंदुलकर क्रिकेटर बनना चाहते थे लेकिन घर के हालातों को समझते हुए अजीत ने टीचिंग का प्रोफेशन अपना लिया और अपने सबसे बड़े सपने को हकीकत में नहीं बदल सके. सचिन अक्सर खाली वक्त में अपने भाई को क्रिकेट खेलते हुए देखते थे. उन्हें अपने भाई के सपने के बारे में पता था.



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अपने भाई का सपना पूरा करने के लिए क्रिकेट को बनाया जुनून

सचिन अपने भाई अजीत को इतना प्यार करते थे कि क्रिकेट को अपनी जिंदगी का मकसद बना लिया. क्रिकेट के लिए अपने भाई के जुनून को देखकर अजीत तेंदुलकर ने उन्हें न सिर्फ खेलना सिखाया बल्कि क्रिकेट कोच रमाकांत आचरेकर से भी मिलवाया. इस तरह सचिन स्कूल से लौटने के बाद कोच रमाकांत आचरेकर के पास क्रिकेट ट्रेनिंग लेने जाते थे.


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अजीत के अलावा अपनी बहन सविता के करीब थे सचिन

अपनी जिंदगी के अनछूए पहलुओं के बारे ‘प्लेयिंग इट माय वे : माय ऑटोबायोग्राफी’ में सचिन ने अपनी बहन सविता का भी जिक्र किया है. जिसमें सचिन लिखते हैं ‘मैं चौथी क्लास में पढ़ता था कि तभी मेरे घर में कोई फंक्शन हुआ और अगले दिन से मेरी बहन सविता, जिन्हें मैं सविता ताई कहकर बुलाता था नजर नहीं आई. मैं हर शाम अपनी मां से पूछता था कि सविता ताई कहां है? मेरे इस सवाल के जवाब में मेरी मां हंसकर मुझे जो भी बताया करती थी, उस दौरान मुझे वो समझ नहीं आता था.’



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सचिन और उनके सौतेले भाई के बीच के किस्सों को सुनकर कोई भी अंदाजा लगा सकता है कि दोनों के बीच कितना प्यार रहा होगा जबकि समाज में सौतेले रिश्तों को लेकर एक ‘स्टीरियोटाइप’ बन चुका है. क्रिकेट के महानायकों में से एक सचिन की जिंदगी का ये अनजाना पहलू स्टीरियोटाइप को तोड़ने के साथ रिश्तों और सपनों के नए मायनों को हमारे सामने लेकर आता है…Next

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