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इंडिया को दो बार दिलाया वर्ल्‍डकप, आज एक नौकरी का मोहताज है ये क्रिकेटर

Posted On: 10 Jan, 2018 Sports and Cricket में

Avanish Kumar Upadhyay

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देश में अगर अकूत दौलत और शोहरत दिलाने वाले खेल के बारे में किसी से पूछा जाए, तो उसका जवाब क्रिकेट ही होगा। मगर इस खेल का दूसरा पहलू भी है, जहां खिलाड़ी दौलत का मोहताज है। शायद आपको यकीन न हो, लेकिन य‍ह सच है कि देश को दो वर्ल्‍डकप दिलाने वाले एक भारतीय क्रिकेटर को जीवनयापन के लिए नौकरी खोजनी पड़ रही है। कई माननीयों से गुहार लगाने के बावजूद उसे नौकरी नहीं मिली। आइये बताते हैं उस मजबूर क्रिकेटर के बारे में, जिसे इतनी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।


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13 साल तक रहे भारतीय टीम का हिस्‍सा


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हम बात कर रहे हैं भारत को दो बार दृष्टिहीन क्रिकेट विश्वकप जिताने वाले शेखर नायक की। शेखर ने अपनी कप्‍तानी में टीम इंडिया को मजबूत बनाया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वे इस समय बेरोजगार हैं। देश के लिए 13 साल तक खेलने वाले शेखर के पास इस समय नौकरी तक नहीं है। शेखर को नौकरी ढूंढने में भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।


30 की उम्र पार करते ही टीम से हो गए बाहर


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शेखर की अगुआई में दृष्टिहीन भारतीय टीम ने पहली बार बैंगलुरू में टी-20 विश्व कप और 2014 में केपटाउन में वनडे क्रिकेट विश्व कप जीता था। 30 की उम्र पार करते ही वे टीम से बाहर हो गए। इसके बाद उन्‍होंने कुछ समय के लिए एक एनजीओ में नौकरी की, लेकिन बाद में व्‍यक्तिगत कारणों से नौकरी छोड़नी पड़ी। 2014 वर्ल्‍डकप में उनके शानदार परफॉरमेंस के लिए कर्नाटक के तत्‍कालीन मुख्‍यमंत्री जगदीश शेट्टार ने शेखर को तीन लाख रुपये का पुरस्‍कार दिया था। उसी पैसे से शेखर को बैंगलुरू में लीज पर मकान मिला।


पत्‍नी और बेटियों के भविष्‍य को लेकर चिंतित


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खबरों की मानें, तो शेखर कहते हैं कि जब लोग मेरी तारीफ करते हैं, तो मैं खुश हो जाता हूं। मगर जब घर आता हूं, तो पत्नी और दो बेटियों पूर्विका (7) और सान्विका (2) के भविष्‍य को लेकर चिंतित हो जाता हूं। मैंने सांसदों और विधायकों से नौकरी देने की गुजारिश की। उन्होंने मुझे आश्वासन भी दिया है, लेकिन अभी तक मैं बेरोजगार ही हूं। मैं सरकार से निवेदन करता हूं कि मुझे मेरी योग्‍यता के अनुसार कोई नौकरी दे दी जाए।


जन्म से ही नहीं है आंखों में रोशनी


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शेखर का जन्‍म कर्नाटक के शिमोगा जिले में हुआ। जन्म के समय से ही उनकी आंखों में रोशनी नहीं थी। शेखर ने शारदा देवी स्कूल फॉर ब्लाइंड में पढ़ते समय क्रिकेट खेलना सीखा। सन् 2000 में शेखर को कर्नाटक की टीम में और 2002 में भारतीय टीम में शामिल किया गया। 2002 से 2015 तक वे टीम इंडिया का हिस्सा रहे। शेखर ने 2010 से 2015 तक भारतीय टीम की कप्‍तानी भी की, लेकिन आज एक नौकरी के मोहताज हैं…Next


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